नई दिल्ली29 मिनट पहले
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राहुल कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् गायन के दौरान ने खड़गे और सोनिया की तरफ इशारा करते दिखे।
भाजपा ने सोनिया गांधी पर कांग्रेस मुख्यालय के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम् गीत रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम का वीडियो शेयर किया।
भाजपा ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान पूरा वंदे मातरम् गाया जा रहा था। कुछ शुरुआती पंक्तियों के बाद ही सोनिया इसे लेकर असहज होने लगीं। उन्होंने गीत रोकने का संकेत दिया।
भाजपा ने दावा किया कि राहुल गांधी भी पूरे गायन के दौरान और राष्ट्रगीत खत्म होने के बाद तक परेशान दिखे। कांग्रेस ने भाजपा के आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि सोनिया ने वंदे मातरम् रोकने की कोशिश नहीं की। वह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं।
4 विजुअल्स में देखिए कार्यक्रम से जुड़ी पूरी घटना…

दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण किया गया। इस दौरान झंडे के दाईं ओर खड़गे और सोनिया, बाईं ओर राहुल गांधी खड़े दिखे।

वंदे मातरम् गाया जा रहा था, तभी सोनिया पीछे मुड़कर इशारा करती दिखीं। राहुल ने भी इशारे में कुछ पूछा।

एक स्टाफ सदस्य खड़गे के पास पहुंचा। खड़गे ने उसके कान में कुछ कहा, फिर सोनिया ने भी उससे बात की।

वंदे मातरम् पूरा होने के बाद खड़गे ने कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण किया।
कांग्रेस बोली- कांग्रेस मुख्यालय पर पूरा वंदे मातरम् गाया गया
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पूरे मामले पर कांग्रेस का पक्ष रखा। उन्होंने कहा- वंदे मातरम् रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई थी। कांग्रेस अध्यक्ष काफी देर से खड़े थे, इसलिए सोनिया गांधी कह रही थीं कि उनके लिए कुर्सी लाकर वहां रख दीजिए।
जयराम रमेश ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय पर 15 अगस्त के कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाया गया था और इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सोनिया के इशारे को वंदे मातरम् रोकने की कोशिश बताना गलत है।
कांग्रेस ने वंदे मातरम् के इतिहास का भी जिक्र किया
जयराम रमेश ने कहा कि 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में वंदे मातरम् के इस्तेमाल को लेकर चर्चा हुई थी। बैठक में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू और सी राजगोपालाचारी जैसे नेता मौजूद थे।
रमेश ने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर तय किया गया था कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् की शुरुआती पंक्तियां गाई जाएंगी। तब से कांग्रेस के अधिवेशनों और कार्यक्रमों में इन्हीं पंक्तियों का इस्तेमाल होता रहा है।
29 जुलाई को नया कानून बना, वंदे मातरम् के अपमान पर 3 साल की सजा
वंदे मातरम् को लेकर यह विवाद ऐसे समय हुआ है, जब संसद ने हाल ही में इसे कानूनी संरक्षण देने वाला नया कानून पास किया है। ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ राज्यसभा से 29 जुलाई और लोकसभा से 30 जुलाई को पारित हुआ था।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 11 अगस्त को इसे मंजूरी दे दी, जिसके बाद यह कानून बना। इस कानून के जरिए वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के बराबर कानूनी संरक्षण दिया गया है। यानी वंदे मातरम् का जानबूझकर अपमान करना या उसके गायन में जानबूझकर रुकावट डालना अब कानून के तहत दंडनीय है। ऐसे मामले में 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
केंद्र का आदेश- पहले वंदे मातरम् , फिर जन गण मन होगा
गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के गायन और बजाने को लेकर नए निर्देश जारी किए थे। इसमें दोनों के सही बोल, उच्चारण और तय प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा गया था।
निर्देशों के मुताबिक, अगर किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम् और जन गण मन दोनों गाए या बजाए जाते हैं, तो पहले वंदे मातरम् और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। अगर किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का अपना राज्य गीत भी है, तो पहले राज्य गीत फिर वंदे मातरम् और अंत में जन गण मन रहेगा।

28 जनवरी को पहली बार आदेश आया
- इससे पहले 28 जनवरी को भी सरकार ने सभी राज्यों को यही आदेश दिया था। इसमें मुताबिक सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत में राष्ट्रगीत बजाया जाएगा।
- वंदे मातरम् के समय हर व्यक्ति को खड़ा होना होगा। राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे। इनकी कुल अवधि 3.10 मिनिट है। पहले दो अंतरे गाए जाते थे।
- सिनेमा हॉल को नए नियमों से दूर रखा गया है। यानी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम् बजाना और खड़ा रहना अनिवार्य नहीं होगा।
- अगर किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री फिल्म के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजाया जाता है, तो दर्शकों को उस दौरान खड़ा होना जरूरी नहीं होगा।
बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था
भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था।
1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम् गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं।
वंदे मातरम् एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम् भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था।

गणतंत्र दिवस परेड में वंदे मातरम की झांकी निकली थी
दिल्ली में कर्तव्य पथ पर मुख्य परेड में इस साल 77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य परेड की थीम वंदे मातरम् रखी गई थी। परेड में संस्कृति मंत्रालय ने वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने का जश्न मनाने वाली झांकी निकाली थी। इस झांकी को मंत्रालयों और विभागों की कैटेगरी में बेस्ट झांकी का अवॉर्ड मिला।

26 जनवरी को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान संस्कृति मंत्रालय की झांकी की तस्वीर।
वंदे मातरम् पर संसद में हुई थी विशेष चर्चा
वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान 8 और 9 दिसंबर को इस पर विशेष चर्चा हुई थी। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरकार बंगाल चुनाव को देखते हुए इसे मुद्दा बना रही है।
भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत वंदे मातरम् के कुछ हिस्से हटाने का आरोप लगाया था। इसके समर्थन में 1937 में जवाहरलाल नेहरू द्वारा सुभाष चंद्र बोस को लिखी चिट्ठी का हवाला दिया।
पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा था, ‘कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे घुटने टेक दिए और वंदे मातरम् के टुकड़े कर दिए। नेहरू को लगता था कि इससे मुसलमानों को चोट पहुंच सकती है।’
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