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औरंगाबाद- नेशनल हैंडलूम डे पर प्रदर्शनी, बिक्री केंद्र का आयोजन:जिला उद्योग केंद्र के जीएम ने बुनकरों को रोजगार और बाजार विस्तार का भरोसा दिया




औरंगाबाद के कुटुंबा प्रखंड स्थित तेलहारा गांव में शुक्रवार को 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर प्रदर्शनी-सह-बिक्री केंद्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन निरंजनपुर डुमरा जगदीशपुर प्राथमिक कंबल बुनकर सहयोग लिमिटेड द्वारा किया गया, जिसमें स्थानीय बुनकरों के उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। इस दौरान तौलिया, चादर, गमछा, कंबल और अन्य हथकरघा उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देना, स्थानीय बुनकरों को बाजार उपलब्ध कराना तथा स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ना था। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष बुनकरों ने इसमें भाग लेकर अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से मिल रहा रोजगार कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक संजीव कुमार ने कहा कि सरकार बुनकरों और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने बताया कि सामर्थ्य योजना के तहत पिछले वर्ष कुटुंबा और नवीनगर की 30 महिलाओं को भागलपुर स्थित बुनकर सेवा केंद्र में प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद ये महिलाएं अपने क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही हैं और अन्य लोगों को भी इस कार्य से जोड़ रही हैं। सहयोग समिति के संचालक रामदयाल पाल ने बताया कि वर्ष 2016 से संचालित हैंडलूम इकाई में छह मशीनों पर विभिन्न प्रकार के कपड़े और भेड़ के ऊन से कंबल तैयार किए जा रहे हैं। इस उद्योग से वर्तमान में 10 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि इच्छुक युवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। भविष्य में रेडीमेड कुर्ता-पायजामा के उत्पादन को बड़े स्तर पर विकसित कर इसे एक ब्रांड के रूप में देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाने की योजना है। बुनकरों ने उठाईं समस्याएं, बाजार और मशीन की मांग कार्यक्रम के दौरान बुनकरों ने अपनी समस्याओं को भी अधिकारियों के सामने रखा। रामदयाल पाल ने बताया कि औरंगाबाद में धागे की स्थानीय उपलब्धता नहीं होने के कारण उत्पादन लागत बढ़ जाती है। उन्होंने जिले में विपणन की बेहतर व्यवस्था विकसित करने तथा भेड़ के ऊन को मुलायम बनाने के लिए आधुनिक मशीन स्थापित कराने की मांग की। वहीं समर्पण खादी ग्रामोद्योग के सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि उनकी संस्था दाउदनगर, ओबरा, कुटुंबा और नवीनगर में हथकरघा गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दे रही है। ओबरा और दाउदनगर में तैयार होने वाले कालीन विदेशों तक भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नौघड़ा और नवाडीह गांव की महिलाओं को कताई, बुनाई और सिलाई का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। वर्तमान में संस्था जिले के करीब 150 महिला और पुरुष बुनकरों को रोजगार उपलब्ध करा रही है। कार्यक्रम में परियोजना प्रबंधक भारत भूषण शर्मा, बीसीओ दिलीप कुमार, बुनकर सेवा केंद्र भागलपुर के निर्दोष कुमार सहित बड़ी संख्या में प्रशिक्षित महिला-पुरुष बुनकर उपस्थित रहे।



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