![]()
औरंगाबाद में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत न्यूट्रिशन किट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल दवाइयों से नहीं जीती जा सकती, बल्कि मरीजों को उचित पोषण, सामाजिक सहयोग और निरंतर प्रोत्साहन भी मिलना चाहिए। यह कार्यक्रम केवल न्यूट्रिशन किट वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि टीबी मुक्त भारत के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में सामूहिक भागीदारी का प्रतीक है। इस अभियान के तहत निक्षय मित्रों एवं विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से टीबी मरीजों को पोषण किट उपलब्ध कराई जा रही है। ताकि उपचार के दौरान उनके शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें और वे तेजी से स्वस्थ हो सकें। किट में चना दाल, सोया चंक्स, मूंगफली, मिल्क पाउडर, आटा एवं खाद्य तेल जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल है। जो मरीजों की प्रोटीन एवं ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहायक होंगे। स्क्रीनिंग 15 हजार से बढ़कर 2.90 लाख तक पहुंची जिला पदाधिकारी ने कहा कि औरंगाबाद जिले ने टीबी उन्मूलन अभियान में उल्लेखनीय प्रगति की है। कुछ समय पहले जहां जिले में टीबी स्क्रीनिंग की संख्या मात्र 15 हजार थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 2.90 लाख तक पहुंच गई है। इस उपलब्धि का श्रेय स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, जीविका दीदियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों को दिया। डीएम ने बताया कि वर्तमान में जिले में 1,951 टीबी मरीजों का नोटिफिकेशन किया गया है और सभी का गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। उपचार के साथ-साथ मरीजों के पोषण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि पर्याप्त पोषण टीबी से शीघ्र स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस कार्यक्रम के तहत कुल 300 न्यूट्रीशन किट वितरित की जा रही हैं। इनमें 100 किट औरंगाबाद सदर के लाभार्थियों को तथा शेष 200 किट जिले के अन्य 10 प्रखंडों के मरीजों को उपलब्ध कराई जाएंगी। समय पर जांच और उपचार पर दिया जोर जिला पदाधिकारी ने चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से टीबी की शीघ्र पहचान, नियमित उपचार और पोषण संबंधी परामर्श को गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने आम लोगों से भी अपील करते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, लगातार बुखार, वजन कम होना या रात में अत्यधिक पसीना आने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो वह बिना देर किए निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में जाकर टीबी की जांच कराएं। टीबी पूरी तरह उपचार योग्य बीमारी है, बशर्ते इसकी समय पर पहचान और नियमित इलाज हो। डीएम ने सामाजिक संगठनों, उद्योगों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सक्षम नागरिकों से ‘निक्षय मित्र’ बनकर टीबी मरीजों के पोषण और उपचार में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयास तभी सफल होंगे, जब समाज भी इस अभियान को अपना अभियान बनाए। अंत में उन्होंने सभी से संकल्प लेने का आह्वान किया कि कोई भी टीबी मरीज उपचार और पोषण से वंचित न रहे। सामूहिक प्रयासों से औरंगाबाद को टीबी मुक्त एवं स्वस्थ जिला बनाया जाए। सभी लाभार्थियों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए अभियान से जुड़े अधिकारियों, स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों एवं सहयोगी संस्थाओं को शुभकामनाएं दी।
Source link
टीबी मुक्त भारत अभियान को मिली नई मजबूती:औरंगाबाद में 300 मरीजों के बीच न्यूट्रिशन किट बांटे गए, जिले में स्क्रीनिंग 2.90 लाख तक पहुंची
