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“हमलोगों ने जब यहां जमीन खरीदी थी, तब यह नहीं बताया गया था कि यह सरकारी जमीन है। कई सालों से हमलोग यहां बसे हुए हैं। रोजी-रोटी के लिए दुकानें भी खोली हैं। यहां बिजली-पानी का बिल भी भर रहे हैं। अब अचानक मकान खाली कराने का सरकार की ओर से नोटिस दिया गया है। हमलोग मर जाएंगे, लेकिन किसी भी हाल में यह जमीन नहीं छोड़ेंगे।” यह कहना है उन पीड़ितों का, जिन्हें प्रशासन ने जमीन खाली कर वहां से शिफ्ट होने का नोटिस दिया है। नोटिस मिलने के बाद लोगों में काफी नाराजगी है। वे इतने परेशान हैं कि खाना-पीना तक छोड़ दिया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई को बिहार सरकार को पटना सिटी में नौजर घाट से कंगन घाट के बीच गंगा किनारे बने सभी अवैध और अनधिकृत मकानों समेत अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद प्रशासन ने करीब 290 मकानों और दुकानों को खाली करने का नोटिस भेजा है। नोटिस के बाद परिवार ने अपनी परेशानी बताई, इस रिपोर्ट में पढ़िए पीड़ितों का दर्द… स्टेशन पर छोला-पूड़ी ठेला पर बेचकर घर बनाया स्थानीय निवासी प्रमिला देवी को भी घर खाली करने का नोटिस मिला है। उन्होंने कहा, “सालभर पहले ही हमने यहां घर बनाया था। अब हमें नोटिस मिल गया है। हमने तीन साल पहले यहां जमीन खरीदी थी। उस समय हमसे नहीं कहा गया कि यह सरकारी जमीन है। अब हमारे घर को तोड़ा जाएगा। नोटिस में हमें घर खाली करने के लिए कहा गया है। हमने 5 लाख रुपए में जमीन खरीदी थी और घर बनाने में 10 लाख रुपए खर्च किए। मेरे पति स्टेशन पर ठेला लगाकर छोला-पूड़ी बेचते हैं। उसी कमाई से जमीन खरीदी और घर बनाया था।” अगर हमारा घर नाजायज तो गुरुद्वारा को भी तोड़ने का नोटिस भेजे कंगन घाट की बबीता देवी ने नोटिस मिलने के बाद गुरुद्वारे को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “यहां की जमीन पर रहने वाले सभी लोगों को नोटिस मिला है, तो गुरुद्वारा भी तो इसी जमीन पर है। गुरुद्वारा जायज है और हमारा घर नाजायज है? अगर तोड़ना ही है तो गुरुद्वारे को भी नोटिस दीजिए।” मेरे पति ऑटो रिक्शा चलाते हैं और उसी से हमारा घर चलता है। सिर से छत हट जाने के बाद आखिर हम बच्चों से ठेला खिंचवाएंगे या उन्हें पढ़ाएंगे? अब इतनी जल्दी दूसरा घर तो नहीं बनेगा। जब जमीन खरीदी गई थी, तब नहीं बताया गया था कि यह सरकारी जमीन है। अगर हमें पता होता, तो हम यहां कभी घर नहीं बनाते। गृह प्रवेश भी नहीं किया, उससे पहले नोटिस आ गया स्थानीय निवासी सरिता देवी ने हाल ही में यहां नया घर बनाया था। अभी गृह प्रवेश भी नहीं किया था कि उन्हें घर खाली करने का नोटिस मिल गया। सरिता ने कहा, “इतने साल से हम यहां घर बनाकर रह रहे हैं, तब किसी ने कुछ नहीं कहा। अब अचानक कहा जा रहा है कि यह सरकारी जमीन है और इसे खाली कर दें। मेरे तीन बच्चे हैं। एक बेटी सयानी है, जिसकी अभी शादी करनी है। आखिर घर टूट जाएगा तो हम कहां जाएंगे? हम लोग अब यही प्रार्थना कर रहे हैं कि किसी तरह हमारी जमीन बच जाए।” टेंशन से घर में कोई खाना नहीं खा रहा संतोष कुमार ने कहा, “सरकार की ओर से हमें नोटिस आया है, लेकिन हमारी जमीन थाना नंबर 110 में है। हमें थाना नंबर 170 से नोटिस आया है, तो हम इसे आखिर क्यों मानें? सरकार कह रही है कि यहां विकास होगा, लेकिन विकास के नाम पर हमें लूटा जा रहा है। मेरे पापा ने यहां घर बनाया था और मेरा जन्म भी यहीं हुआ है। मेरे परिवार में छोटे-छोटे बच्चे हैं। आखिर अब हम लोग कहां जाएंगे? नोटिस मिलने के बाद तनाव इतना बढ़ गया है कि घर में कोई खाना नहीं खा रहा है। सभी लोग अन्न-पानी छोड़े हुए हैं। हम लोग विधायक और पार्षद के पास भी गए, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। हम लोग मर जाएंगे, लेकिन घर खाली नहीं करेंगे।” गोईठा ठोककर जमीन लिए, अब नहीं छोड़ेंगे गणिता देवी ने कहा, “हमारी तीन पीढ़ियां यहां बीत गई हैं। अब जाकर हमें यहां से खाली करने का नोटिस आया है। जब यहां पानी भरा रहता था, तब तो हमें यहां से नहीं भगाया गया। अब जब हम यहां घर बनाकर अच्छे से रह रहे हैं, तो यह जमीन सरकार की हो गई? यह मेरी जमीन है, मेरे बाप-दादा की जमीन है। इसे मैं किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ूंगी। मर जाएंगे, मिट जाएंगे, लेकिन जमीन नहीं छोड़ेंगे। जब रजिस्ट्री करने गए थे, तभी बता देते कि यह सरकारी जमीन है, तो हम इसे नहीं लेते। हम गरीब आदमी हैं, उपले ठोककर पैसे जुटाए और जमीन खरीदी है। अब इस जमीन को नहीं छोड़ेंगे।” बिजली-पानी का टैक्स भर रहे हैं और अब घर खाली करने कहा जा रहा 40 साल से इलाके में रह रहे गुलाब ने कहा, “हमें भी नोटिस आया है। आखिर अब हम जाएं तो कहां जाएं? अपने बाप-दादा की संपत्ति बेचकर हमने यहां जमीन खरीदी और घर बनाया था। जब हमने जमीन की रजिस्ट्री कराई थी, तब हमें कुछ नहीं कहा गया था। हमने पानी और बिजली की सुविधा मांगी तो सरकार ने वह भी उपलब्ध कराई। हम सभी तरह के टैक्स भर रहे हैं और अब कहा जा रहा है कि यह सरकारी जमीन है, इसे खाली कर दो।” सरकार हमारी जमीन जबरदस्ती हड़पना चाहती दिलीप कुमार ने कहा, “हम ठेला-रिक्शा चलाकर पैसे जुटाए और यहां जमीन खरीदी, फिर घर बनाया। अगर कल यह घर टूट जाता है, तो हम अपने बच्चों को लेकर कहां जाएंगे? अपने बच्चों के भविष्य के लिए आखिर हम लोग क्या कर पाएंगे? हम सरकार से गुहार लगाते हैं कि हमारी जमीन नहीं ली जाए। इस नोटिस से हमें काफी सदमा लगा है। घर में बच्चे भी हताश हैं। हम लोग थाना नंबर 110 में रह रहे हैं। इसलिए थाना नंबर 169-170 से आए नोटिस को हम नहीं मानेंगे। हमें लगता है कि सरकार जबरदस्ती हमारी जमीन हड़पना चाहती है।”
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पटना- गंगा किनारे बसे 290 घरों को गिराने का नोटिस:लोग बोले- अवैध था तो पहले क्यों नहीं बताया, मर जाएंगे..जमीन नहीं छोड़ेंगे; पीड़ितों का दर्द
