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नवादा जिले के एनएच-20 स्थित सीतारामपुर गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कई घरों को तोड़ दिया गया है। स्थानीय महादलित परिवारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के बेघर कर दिया गया। इस कार्रवाई से प्रभावित परिवारों में भारी नाराजगी है और उनके सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि नियमानुसार अतिक्रमण हटाने से पहले नोटिस दिया जाना चाहिए था। उन्होंने प्रशासन से कार्रवाई की प्रक्रिया स्पष्ट करने और प्रभावित परिवारों की समस्याओं पर ध्यान देने की मांग की है। उनका आरोप है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के घरों को तोड़े जाने से गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। महादलित परिवारों पर ‘अत्याचार’ का लगाया आरोप इस मामले की जानकारी हम पार्टी के जिलाध्यक्ष अशोक मांझी ने बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन को दी है। अशोक मांझी ने महादलित परिवारों पर ‘अत्याचार’ का आरोप लगाते हुए कहा कि अतिक्रमण हटाने से पहले सभी प्रभावित लोगों को नियमानुसार नोटिस देना अनिवार्य था। मांझी ने जोर देकर कहा कि यदि पूरे गांव के लोग नोटिस नहीं मिलने की बात कह रहे हैं, तो जिला प्रशासन को इसकी गहन जांच करनी चाहिए कि नोटिस किसे और कब दिया गया था। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। समस्याओं का समाधान नहीं होने पर करेंगे आंदोलन अशोक मांझी ने चेतावनी दी है कि यदि प्रभावित परिवारों के रहने की व्यवस्था नहीं की गई और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो जिले में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीब और महादलित परिवारों को बेघर करना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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नवादा में बिना नोटिस घर तोड़े जाने का आरोप:महादलित परिवारों में नाराजगी, हम पार्टी ने दी आंदोलन की चेतावनी
