राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कोचिंग संचालक रौशन आनंद की गिरफ्तारी के मामले में पटना पुलिस की कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा को मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट 3 सितंबर 2026 तक हर हाल में सौंपने का निर्देश दिय
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आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट नहीं मिलने पर जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
मामला पटना के चर्चित कोचिंग संचालक रौशन आनंद की गिरफ्तारी से जुड़ा है। रौशन आनंद ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के निदेशक हैं।
जून 2026 की शुरुआत में मुसल्लापुर हाट स्थित खान ग्लोबल स्टडीज परिसर में तोड़फोड़, मारपीट और गोलीबारी की घटना हुई थी। इस घटना के बाद कदमकुआं थाना पुलिस ने रौशन आनंद को गिरफ्तार किया था।

पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा।
गिरफ्तारी पर उठे थे सवाल
रौशन आनंद की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। आरोप लगाया गया कि पुलिस ने पर्याप्त जांच किए बिना उन्हें मामले का मुख्य आरोपी या सूत्रधार मानते हुए गिरफ्तार कर लिया।
यह भी आरोप लगाया गया कि गिरफ्तारी के दौरान उनकी किडनी की बीमारी को भी ध्यान में नहीं रखा गया और उन्हें जेल भेज दिया गया।
इसी कार्रवाई को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता विशाल रंजन ने 10 जून 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई। वे ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला फाउंडेशन के चेयरमैन हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने रौशन आनंद के खिलाफ निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई नहीं की। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि खान ग्लोबल स्टडीज से जुड़े लोगों के प्रभाव में आकर रौशन आनंद को आपराधिक मामले में फंसाया गया।
NHRC ने लिया मामले का संज्ञान
शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की खंडपीठ ने मामले का संज्ञान लिया। आयोग ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस से पूरी जांच रिपोर्ट मांगी थी।
आयोग की ओर से पटना एसएसपी को पहले 30 जून तक रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, तय समय सीमा में रिपोर्ट नहीं मिलने के बाद आयोग ने अब इस मामले में सख्ती दिखाई है।
अब पटना पुलिस को 3 सितंबर 2026 तक विस्तृत और निष्पक्ष जांच रिपोर्ट आयोग के सामने पेश करनी होगी। आयोग के निर्देश को अंतिम चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

रिपोर्ट नहीं देने पर कार्रवाई की चेतावनी
NHRC ने साफ किया है कि अगर निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट दाखिल नहीं की जाती है तो मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
ऐसे में अब पटना पुलिस के सामने न केवल घटना की जांच, बल्कि अपनी पिछली कार्रवाई का भी पूरा ब्योरा आयोग के सामने रखने की चुनौती है।
आयोग यह जानना चाहता है कि रौशन आनंद की गिरफ्तारी किन तथ्यों और सबूतों के आधार पर की गई, पुलिस ने मामले की जांच किस तरह की और गिरफ्तारी के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं।
खान सर और रौशन आनंद के बीच विवाद से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला पटना के दो चर्चित शिक्षकों और कोचिंग संचालकों—खान सर और रौशन आनंद—के बीच चल रहे विवाद की पृष्ठभूमि में सामने आया है। दोनों के कोचिंग संस्थानों के बीच लंबे समय से प्रतिस्पर्धा को लेकर चर्चा होती रही है।
मुसल्लापुर हाट स्थित खान ग्लोबल स्टडीज परिसर में हुई हिंसक घटना के बाद यह विवाद और बढ़ गया। घटना में तोड़फोड़, मारपीट और गोलीबारी के आरोप सामने आए थे। इसी मामले में रौशन आनंद की गिरफ्तारी हुई थी।
हालांकि, रौशन आनंद पक्ष की ओर से पुलिस की कार्रवाई को गलत और एकतरफा बताया गया था। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस की कार्रवाई और अपने विरोधी पक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाए थे।
कोर्ट से मिल चुकी है जमानत
रौशन आनंद को पटना सिविल कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। जमानत के दौरान कोर्ट ने भी दोनों पक्षों को आपसी विवाद को लेकर नसीहत दी थी।
कोर्ट ने कहा था कि शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, न कि विवाद हिंसा तक पहुंचना चाहिए। कोर्ट की इस टिप्पणी को दोनों कोचिंग संचालकों के बीच चल रहे विवाद को लेकर महत्वपूर्ण माना गया था।
अब NHRC की निगरानी में जांच
रौशन आनंद की गिरफ्तारी का मामला अब केवल पटना पुलिस की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संज्ञान लेने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर आयोग की भी नजर है।
अब 3 सितंबर तक पटना पुलिस को यह बताना होगा कि रौशन आनंद को किन परिस्थितियों में गिरफ्तार किया गया, उनके खिलाफ क्या साक्ष्य थे और जांच के दौरान पुलिस ने सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया या नहीं।

