5 घंटे पहले
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कल (बुधवार, 12 अगस्त) सावन मास की अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या है। इस बार सावन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण भी होने जा रहा है, लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए ग्रहण का सूतक भी नहीं होगा। पूरे दिन हरियाली अमावस्या से जुड़े सभी धर्म-कर्म किए जा सकेंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, हरियाली अमावस्या प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है। इसके साथ ही इस दिन सार्वजनिक जगहों पर छायादार और फलदार पेड़ों के पौधे लगाने की भी परंपरा है। पौधे लगाने के साथ ही पेड़ बनने तक इनकी देखभाल करने का संकल्प भी लेना चाहिए।
भारत में नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण
कल होने वाला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। अगर कोई ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई नहीं देता है, तो वहां उस ग्रहण का सूतक मान्य नहीं होता है। इसलिए 12 अगस्त को मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और पूजा-पाठ सहित सभी धार्मिक गतिविधियां नियमित रूप से की जा सकेंगी। श्रद्धालु भगवान शिव का अभिषेक, रुद्राभिषेक, बिल्व पत्र अर्पण, दान-पुण्य, पितरों के तर्पण और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर सकेंगे।
सूर्य ग्रहण का समय और कहां-कहां दिखेगा
भारतीय समय अनुसार सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात करीब 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की रात करीब 1:28 बजे तक रहेगा। यह ग्रहण उत्तरी प्रशांत महासागर, पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका में दिखेगा।
पानी में गंगाजल मिलाकर करें स्नान
अमावस्या तिथि को पितरों की पूजा और तर्पण के लिए भी विशेष माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों और तीर्थस्थलों में स्नान करके पितरों के निमित्त तर्पण करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए तर्पण और दान से पितरों को संतुष्टि मिलती है।
जो लोग किसी तीर्थ या पवित्र नदी तक नहीं जा सकते, वे घर पर भी स्नान की धार्मिक विधि कर सकते हैं। इसके लिए पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इसके बाद पितरों को याद करते हुए अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, जल, वस्त्र या जरूरत की अन्य वस्तुओं का दान करना किया जाता है।
सूर्य पूजा से करें दिन की शुरुआत
- अमावस्या पर दिन की शुरुआत सूर्य पूजा के साथ करनी चाहिए। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें, जल में कुमकुम, फूल, चावल डालें। इसके बाद ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं।
- घर के मंदिर में स्थापित बाल गोपाल का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और बाल गोपाल को अर्पित करें। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें। दूध के बाद शुद्ध जल चढ़ाएं। सुंदर और कोमल लाल-पीले चमकीले वस्त्र भगवान को पहनाएं। हार-फूल से श्रृंगार करें। चंदन का तिलक लगाएं। तुलसी के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाएं। कर्पूर जलाकर आरती करें।
- किसी गौशाला में हरी घास और आर्थिक सहायता भी दे सकते हैं। दान करते समय सेवा और श्रद्धा की भावना को महत्व देना चाहिए। अमावस्या पर पशु-पक्षियों को भोजन कराने की भी परंपरा है। इस दिन गायों के अलावा कुत्तों और कौवों को भी रोटी या अन्य भोजन करा सकते हैं। इसे जीव सेवा और पितरों के प्रति श्रद्धा से जोड़कर देखा जाता है।
- सावन अमावस्या होने के कारण इस दिन भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल और अपनी परंपरा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सकते हैं। बिल्व पत्र चढ़ाकर भगवान शिव के मंत्रों का जप करना चाहिए। इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जप या भगवान शिव के नाम का स्मरण भी कर सकते हैं। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार रुद्राभिषेक और जलाभिषेक भी कर सकते हैं। भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण इन धार्मिक गतिविधियों पर ग्रहण संबंधी कोई बाधा नहीं मानी जाएगी।
- बुधवार और अमावस्या के योग में प्रथम पूज्य भगवान गणपति का विधिवत पूजन करना चाहिए। विधिवत पूजा नहीं कर पा रहे हैं, तो दूर्वा चढ़ाएं, मोदक का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाएं और आरती करें। पूजा में ऊँ गं गणपतयै नम: मंत्र का जप करना चाहिए।

