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RJD Bihar Org Reshuffle | Tejashwi Yadav Action Plan & Leadership List


बांकीपुर उपचुनाव के झटके और पार्टी के भीतर उभरी असंतोष की आवाजों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में एक बड़े संगठनात्मक फेरबदल की शुरुआत हो चुकी है।

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तेजस्वी यादव के निर्देश पर प्रदेश कमेटी से लेकर सभी 55 जिलों की इकाइयां, प्रखंड, पंचायत और विभिन्न इकाइयों को भंग कर दिया गया है।

स्पेशल रिपोर्ट में जानिए, क्यों हुआ ऑपरेशन ओवरऑल, किन-किन नेताओं को बदल दिया जाएगा…।

क्यों हुआ ‘ऑपरेशन ओवरऑल’?

बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों और सीनियर नेताओं के तीखे बयानों के बाद पार्टी आलाकमान ने संगठन की कमजोरियों को दूर करने का फैसला लिया।

सूत्रों के मुताबिक, जो जिलाध्यक्ष बूथ और पंचायत स्तर तक कमेटियां बनाने में नाकाम रहे, उनका हटना तय है।

मुस्लिम वोट बैंक पर प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी की नजर और हाल में RJD कार्यकर्ताओं का डेटा लीक होने की खबरों के बाद पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।

यही कारण है कि बांकीपुर हार के बाद तेजस्वी यादव अब वफादार, कर्मठ और ऊर्जावान नेताओं को ही जिम्मेदारी सौंपना चाहते हैं।

RJD की नई कोर टीम को तैयार करने की जिम्मेदारी तेजस्वी यादव ने अपने सबसे विश्वसनीय रणनीतिकारों को सौंपी है। जिसमें भोला यादव, अब्दुल बारी सिद्दीकी, सुनील कुमार सिंह का नाम प्रमुख है।

इन नेताओं की सलाह और फीडबैक के आधार पर ही जिलों और प्रदेश स्तर पर नई टीम का चयन होगा। तेजस्वी मुस्लिम और भरोसेमंद नेताओं पर दांव लगाएंगे।

तेजस्वी यादव ने शनिवार को सासाराम के दिनारा जाकर चंद्रेश्वर चौधरी के परिजनों से मुलाकात की। आरोप है कि बेटे की बकाया मजदूरी मांगने पर चंद्रेश्वर की हत्या हुई।

तेजस्वी यादव ने शनिवार को सासाराम के दिनारा जाकर चंद्रेश्वर चौधरी के परिजनों से मुलाकात की। आरोप है कि बेटे की बकाया मजदूरी मांगने पर चंद्रेश्वर की हत्या हुई।

पूर्व विधायक सतीश दास ने भास्कर को बताया, ‘कमेटियों का पुनर्गठन एक सामान्य और तय प्रक्रिया का हिस्सा भी है। कमेटियां भंग होने की असली वजह…

  • कार्यकाल की समाप्ति: पार्टी की कमेटियां 2022 में 3 साल के लिए गठित हुई थीं, जिनका कार्यकाल 2025 में ही पूरा हो चुका था। चुनाव के कारण पुरानी कमेटियों को ही जारी रखा गया था।
  • युवा और ऊर्जावान चेहरों की एंट्री: अब संगठन में नए, ऊर्जावान और अनुशासित युवाओं को आगे लाया जाएगा।
  • गतिविधियों का रिपोर्ट कार्ड: चुनाव के दौरान किस नेता की क्या भूमिका और गतिविधि रही, उसकी समीक्षा के आधार पर ही नई जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।

औरंगाबाद के पूर्व जिलाध्यक्ष अनिल टाइगर कहते हैं, ‘आज का चुनाव काम से ज्यादा समीकरणों पर टिका है। हम अतिपिछड़ों और दलितों को जोड़ने में लगे हैं। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पार्टी को और धारदार बनाया जाएगा।’

गया के पूर्व जिलाध्यक्ष मो. मुर्शिद आलम कहते हैं, ‘पार्टी को जमीनी कार्यकर्ताओं को जगाना होगा। 18 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले वोट बैंक को उनका हक और उचित सम्मान मिलना चाहिए। अखिलेश यादव की तरह तेजस्वी को भी गांव-गांव का दौरा करना होगा।’

मुंगेर के पूर्व जिला अध्यक्ष संजय बिंद कहते हैं, ‘पार्टी को मजबूत करने के लिए ‘राजद चले गांव की ओर’ अभियान चलाना चाहिए। नेताओं को पंचायतों में जाकर रात बितानी होगी और पुराने-वफादार कार्यकर्ताओं को दोबारा तवज्जो देनी होगी।’

तेजस्वी यादव ने मृतक बंटी यादव के परिजनों से बात की। उन्हें 5 लाख रुपए का चेक दिया।

तेजस्वी यादव ने मृतक बंटी यादव के परिजनों से बात की। उन्हें 5 लाख रुपए का चेक दिया।

तेजस्वी यादव का ‘3 पॉइंट एक्शन प्लान’

चौतरफा नसीहतों और खिसकते वोट बैंक को संभालने के लिए तेजस्वी यादव ने मुख्य रूप से तीन प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया है।

  1. हार का आत्ममंथन: सीनियर नेताओं और युवाओं की निष्क्रियता की जवाबदेही तय करना।
  2. पूरे संगठन का पुनर्गठन: वफादार और विश्वसनीय नेताओं की नई टीम तैयार करना। कोर टीम में भोला यादव, अब्दुल बारी सिद्दीकी और सुनील कुमार सिंह जैसे दिग्गज शामिल रहेंगे, जिनकी सलाह पर नया संगठन ढांचा तैयार होगा।
  3. आक्रामक जन-आंदोलन: राज्य की नीतीश-सम्राट सरकार को कानून-व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर घेरना।

बदले जा सकते हैं प्रदेश अध्यक्ष

बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को भी बदला जा सकता है। प्रदेश अध्यक्ष के लिए कौन-कौन रेस में…

परिवार के लोगों की भावना का सम्मान

नई कमेटी में तेजस्वी परिवार के अंदर के लोगों की भावना का ख्याल रखेंगे इसकी गुंजाइश है। हाल में सारण जिले के पार्टी प्रवक्ता हरेलाल यादव को आरजेडी ने छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया। इस पर रोहिणी का गुस्सा फूट पड़ा था।

रोहिणी ने कहा था कि सच बोलने और ईमानदारी से काम करने वालों पर कार्रवाई हो रही है। रोहिणी का फोकस रहा है कि पार्टी में लालू वादियों को तरजीहदी जाए।

भाई तेजप्रताप यादव भी कह रहे हैं कि परिवार के बिना उनका मन नहीं लग रहा। मदद के लिए भाई को उन्होंने आवाज भी दी। तेजप्रताप को पुलिस जेल ले गई तो उनके बचाव में तेजस्वी ने बयान भी दिया था।

इसलिए बहुत संभव है कि तेजस्वी परिवार के लोगों की भावना का ख्याल रखें। लेकिन तेजस्वी ऐसे किसी भी व्यक्ति को पद नहीं देंगे जिस पर तनिक भी संदेह उन्हें होगा कि वह उनके साथ भीतरघात कर सकता है।

आरजेडी के अंदर शुरू हो गई खींचतान

वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं, ‘ आरजेडी के अंदर आपस में ही खींचतान शुरू हो गई है। मुझे नहीं लगता कि तेजस्वी इसको कंट्रोल कर पाएंगे। भविष्य अच्छा नहीं दिख रहा है। सीनियर लीडर खामोश हैं, नौजवान आपस में टकरा रहे हैं।’

‘मृत्युंजय तिवारी ने आरजेडी छोड़ा तो यही कहा कि पार्टी में कोई सुनने वाला नहीं है, तेजस्वी भी नहीं सुनते, सभी जगह अपनी बात रख कर वे देख चुके। उदय नारायण चौधरी और भाई वीरेन्द्र जैसे पुराने नेता आवाज उठा रहे हैं।’

एनडीए ही नहीं अब जन सुराज से भी मिल रही चुनौती

वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क ने कहा, ‘तेजस्वी यादव करीब महीने भर की विदेश यात्रा से लौटने के बाद सक्रिय हुए हैं। सेक्स रैकेट के खिलाफ आवाज उठाने वाले बंटी यादव की हत्या के पखवाड़े बाद उनके परिजनों से मिले और पांच लाख रुपए की मदद पहुंचाई।’

‘राजद के सांगठनिक ढांचे में बदलाव के लिए जिला इकाइयां भंग कर दीं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी को बिहार आने का न्योता दिया। यह सब कुछ उन्होंने तब किया है, जब जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा के साथ राजद प्रत्याशी को भी पटखनी दे दी है।



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