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नालंदा पुलिस को साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने फर्जी एजेंट बनकर स्वामी फाइनेंस लोन, केरला लॉटरी और पुराने सिक्कों-नोटों के बदले भारी रकम दिलाने का झांसा देकर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। इस मामले में तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। साइबर पोर्टल की सूचना पर त्वरित कार्रवाई साइबर डीएसपी ऋषभ आनंद ने बताया कि विभाग के पोर्टल से मिले संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच के आधार पर कार्रवाई की गई है। साइबर थाने की पुलिस टीम ने पावापुरी थाना क्षेत्र के गाजीपुर गांव स्थित एक बगीचे में छापेमारी कर तीनों आरोपियों को धर दबोचा। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सकुचीसराय निवासी मुन्ना कुमार, गाजीपुर के युवराज कुमार और मुन्नु कुमार के रूप में की गई है। पुलिस ने तलाशी के दौरान इनके पास से साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए जा रहे 5 टच स्क्रीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। कम ब्याज पर लोन और लॉटरी का झांसा देकर करते थे ठगी पूछताछ में आरोपियों के ठगी करने के तौर-तरीकों की जानकारी सामने आई है। ये शातिर अपराधी विभिन्न कंपनियों का फर्जी प्रतिनिधि बनकर जरूरतमंद लोगों को स्वामी फाइनेंस से बहुत कम ब्याज पर तत्काल लोन दिलाने का प्रलोभन देते थे। उनसे प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम ऐंठते थे। इसके अलावा, केरला लॉटरी में भारी इनाम जीतने का फर्जी संदेश भेजकर टैक्स और क्लीयरेंस के नाम पर पैसे मंगवाते थे। साथ ही, पुराने सिक्कों और दुर्लभ नोटों को लाखों रुपए में बिकवाने का लालच देकर भोले-भाले लोगों को अपने वित्तीय जाल में फंसाकर ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। आरोपियों को भेजा गया जेल, पुलिस टीम को मिली सराहना इस संबंध में नालंदा साइबर थाना में कांड दर्ज करते हुए सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस सफल कार्रवाई में साइबर थाने के दरोगा अबू तालीब अंसारी, दरोगा तौकीर खान, सिपाही पुनेश कुमार, रवि कुमार और गृह रक्षक करण कुमार, संदीप कुमार शामिल थे। अज्ञात संदेश व कॉल से सतर्क रहने की अपील पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात फोन कॉल, व्हाट्सऐप मैसेज या ऑनलाइन विज्ञापन पर बिना सत्यापन किए भरोसा न करें और पूरी तरह सतर्क व सुरक्षित रहें।
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नालंदा में बगीचे से तीन साइबर ठग अरेस्ट:कम ब्याज पर लोन दिलाने का झांसा देते थे, प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम ऐंठते थे
