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अन्नपूर्णा सामाजिक भोजनालय स्वास्थ्य योजना:आम वोटर परिषद ने CM को भेजा हर वार्ड में भोजनालय खोलने का प्रस्ताव, मकसद-कोई भूखा न सोए




ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) 2025 के अनुसार, भारत में लगभग 17.2 करोड़ लोग अल्पपोषण से प्रभावित थे। 5 साल से कम उम्र के 32.9% बच्चे ठिगनेपन और 18.7% बच्चे दुबलेपन से प्रभावित थे। भूख और कुपोषण आज भी मानवता की गंभीर चुनौतियां हैं। इनके समाधान के लिए पौष्टिक भोजन की उपलब्धता, खाद्य सुरक्षा और प्रभावी जनभागीदारी जरूरी है। इस भयावह स्थिति का एक बहुत बड़ा कारण भोजन का कुप्रबंधन है। एक तरफ भूखे लोगों की बड़ी भीड़ है। वहीं, दूसरी तरफ अनाज प्रबंधन के अभाव में कच्चे और पक्के सभी तरह के अनाज फल सब्जियां बड़ी मात्रा में बर्बाद हो रही है। इसी समस्या के समाधान के लिए आम वोटर परिषद् ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को “अन्नपूर्णा सामाजिक भोजनालय स्वास्थ्य योजना” लागू करने का प्रस्ताव भेजा है। मकसद है कि कोई भूखा न सोए। बच्चों को कुपोषण का शिकार न होना पड़े। यदि राज्य में यह सुनिश्चित कर दिया जाए कि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए और उपयोग योग्य भोजन व्यर्थ न जाए, तो सामाजिक अपराधों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। समाज में सुरक्षा, संवेदनशीलता और सामाजिक समरसता को नई दिशा मिल सकती है। पूरे बिहार भर में कुल 6238 केंद्र खोलने की आवश्यकता है जिसमें 4875 शहरी वार्ड तथा सभी 536 ब्लॉक शामिल हैं। AI आधारित कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम होगी निगरानी इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका AI आधारित कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम है। प्रस्ताव के अनुसार राज्य स्तर पर एक आधुनिक नियंत्रण केंद्र स्थापित किया जाए, जहां से प्रत्येक वार्ड में संचालित भोजनालयों की गतिविधियों की निगरानी की जा सके। आम नागरिक भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह देख सकेंगे कि किस भोजनालय में कितने लोग भोजन कर रहे हैं। किस केंद्र पर कौन-सी खाद्य सामग्री कम हो रही है। कहां सहयोग की आवश्यकता है तथा किस स्थान पर कितना भोजन उपलब्ध है। इससे योजना पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और जनभागीदारी आधारित बनेगी। प्रस्ताव में राज्य के प्रत्येक वार्ड एवं सभी प्रखंडों में चरणबद्ध तरीके से अन्नपूर्णा सामाजिक भोजनालय स्थापित करने का सुझाव दिया गया है। यहां 10, 15 एवं 20 रुपए के सहयोग से सम्मानपूर्वक पौष्टिक एवं संतुलित भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। योजना के संचालन के लिए केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहने के बजाय जनसहभागिता मॉडल अपनाने का सुझाव दिया गया है। इसके अंतर्गत स्थानीय किराना दुकानदार, सब्जी विक्रेता, फल विक्रेता इलाके के अथवा वार्ड के सभी होटल, नमकीन एवं मिठाई की छोटी बड़ी दुकान है किसान, व्यापारिक प्रतिष्ठान, उद्योग, महिला स्वयं सहायता समूह, धार्मिक संस्थाएं, स्वयंसेवी संगठन तथा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से सहयोग प्राप्त किया जाएगा। प्रत्येक सहयोगी अपनी क्षमता के अनुसार खाद्यान्न, सब्जियां, मसाले, आर्थिक सहायता अथवा अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा सकेगा। इससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और योजना समाज के सहयोग से दीर्घकाल तक आत्मनिर्भर रूप से संचालित हो सकेगी। प्रस्ताव में यह भी सुझाव दिया गया है कि होटलों, रेस्टोरेंटों, विवाह समारोहों, धार्मिक आयोजनों तथा सब्जी मंडियों में बचने वाले सुरक्षित एवं उपयोग योग्य भोजन एवं खाद्य सामग्री का वैज्ञानिक ढंग से इकट्ठा कर बांटा जाए ताकि भोजन की बर्बादी रोकी जा सके और अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक पौष्टिक भोजन पहुंचाया जा सके। इससे पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता तथा खाद्य संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। आम वोटर परिषद् की तरफ से राष्ट्रीय महासचिव गव्यसिद्ध डॉ. अश्वनी कुमार, कर्नाटक राज्य सचिव श्वेता मिश्रा, परिषद के लीगल सेल से पटना उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मनाथ प्रसाद यादव, स्मिता श्रेयस तथा अधिवक्ता श्वेता कुमारी शामिल हुई और अन्नपूर्णा सामाजिक भोजनालय के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से रखा गया।



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