54 मिनट पहले
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मणिपुर के कामजोंग जिले के चस्साद गांव में शनिवार को कुकी और नगा समुदायों के हथियारबंद समूहों के बीच गोलीबारी हुई। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हो गए। पुलिस अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हमले के पीछे नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-इसाक मुइवा (NSCN-IM) और म्यांमार के तांगखुल उग्रवादी थे। हालांकि, इन आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी से अब तक 50 से ज्यादा आम नागरिक मारे जा चुके हैं। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी शाम तक जारी रही
पुलिस के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी शुरू हुई, जो शाम तक जारी रही। इसमें गांव के मुखिया थंगजाहौ हाओकिप समेत खाइलुन हाओकिप, सेइखोहौ हाओकिप, हेगिन हाओकिप और सेइपाओ हाओकिप घायल हो गए।
असम राइफल्स के जवानों ने सभी घायलों को बचाकर अर्धसैनिक बल के अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि, इलाज के दौरान सेइखोहौ हाओकिप की मौत हो गई। बाकी घायलों का इलाज जारी है।
कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (CoTU) ने चस्साद गांव पर हुए हमले की निंदा की है। संगठन ने राज्य सरकार से इलाके में केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात करने की मांग की है। इस मामले में सरकार की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है।
दो दिनों में 10 लोगों की मौत हुई
कांगपोकपी जिले में 52 साल के अजिनबोउ आर की हत्या के बाद उनका कटा सिर लौटाने की मांग उठी है। नगा संगठन जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल मणिपुर ने केंद्र और राज्य सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था।
अजिनबोउ की 10 अक्टूबर को मकुई अशांग गांव में उग्रवादी हमले में हत्या कर दी गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हथियारबंद लोगों के बीच उनका कटा सिर दिखाई दिया था।
मणिपुर में नगा-कुकी हिंसा में 9 और 10 अक्टूबर को 10 लोगों की मौत हुई। तनाव के चलते कांगपोकपी और कामजोंग जिलों में 24 घंटे का कर्फ्यू लगाया गया था।

कुकी-बहुल गांव चसाद में 10 अक्टूबर को एक महिला की गोली मारकर हत्या की गई थी, जिसके बाद हिंसा भड़क गई।
फरवरी से कई जिलों तक फैला संघर्ष
नगा और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष पहले उखरुल जिले तक सीमित था, लेकिन अब यह सेनापति, तामेंगलांग और अन्य जिलों तक फैल चुका है। दोनों समुदाय एक-दूसरे पर उग्रवादियों को पनाह देने और इलाके में वर्चस्व कायम करने के आरोप लगा रहे हैं।
फरवरी में हिंसा दोबारा शुरू होने के बाद से उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, तामेंगलांग और नोनी समेत कई इलाकों में घटनाएं हुई हैं। इस हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मौत और दर्जनों घरों में आगजनी की खबरें सामने आई हैं।
इससे पहले मणिपुर में इम्फाल घाटी के मैतेई और आसपास के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा में 300 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। 49 लोग लापता हुए थे और हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे।


