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Bihar DGP Vinay Kumar Appointed CIC


DGP विनय कुमार बिहार के नए मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) होंगे। सम्राट सरकार ने उनके स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) आवेदन को महज 24 घंटे में मंजूरी दे दी। साथ-साथ CIC बनाने का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया।

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विनय कुमार DGP पद से क्यों हटे, उन्हें CIC क्यों बनाया गया, जानेंगे; बूझे की नाही में…।

सवाल-1ः IPS अफसर विनय कुमार हटे या हटाए गए?

जवाबः इसका सीधा जवाब देना मुश्किल है। चूंकि विनय कुमार की परिस्थिति ऐसी है कि आप हर तरह का अनुमान लगा सकते हैं। इसे सिलसिलेवार तरीके से समझिए…

  • 1991 बैच के IPS अफसर विनय कुमार का DGP का कार्यकाल 12 दिसंबर 2026 तक था। सूत्रों की मानें तो अप्रैल में राज्य में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद उनकी ट्यूनिंग राज्य सरकार से ठीक से बैठ नहीं पा रही थी।
  • इस बीच सरकार के स्तर पर उनकी लंबी बातचीत हुई। इसमें आगे की रूपरेखा तय की गई है। इसके बाद उन्होंने 15 सितंबर से 5 अक्टूबर तक की लंबी छुट्टी का आवेदन कर दिया। जिसे उसी दिन गृह विभाग ने मंजूरी दे दी।
  • सूत्रों के मुताबिक, उसी बैठक में तय हो गया कि विनय कुमार छुट्टी से लौटने के बाद नई जिम्मेदारी निभाएंगे। पुलिस महकमा की जिम्मेदारी 1991 बैच की IPS अफसर प्रीता वर्मा निभाएंगी।
  • DGP विनय कुमार ने लंबी छुट्टी का कारण निजी और स्वास्थ्य बताया था। हालांकि, उन्होंने छुट्टी पर जाने से पहले राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए आवेदन कर दिया था।
  • भास्कर को मिली जानकारी के मुताबिक, विनय कुमार ने 21 सितंबर को पटना के प्राइवेट हॉस्पिटल में गॉल ब्लैडर में स्टोन का ऑपरेशन कराया। 25 सितंबर को उन्होंने VRS का आवेदन किया। जिसे सरकार ने 24 घंटे के अंदर यानी 26 सितंबर को ही मंजूरी दे दी।
  • साथ ही 26 सितंबर की रात सरकार ने IPS अफसर विनय कुमार को राज्य का मुख्य सूचना आयुक्त बनाने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया।
  • इससे पहले 25 सितंबर की शाम हुई बैठक में विनय कुमार के CIC बनने पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, डिप्टी CM विजय चौधरी और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सहमति जताई थी।

सवाल-2ः विनय कुमार को DGP पद से क्यों हटाया गया?

जवाबः मौटे तौर पर इसके 2 बड़े कारण हैं। समझिए…

1. एक्शन में नहीं दिख रहे थे, सरकार ने कार्रवाई का मैसेज दिया

हाल के दिनों में लॉ एंड ऑर्डर पर सरकार लगातार घिर रही थी। भरत तिवारी एनकाउंटर हो या जहानाबाद NEET स्टूडेंट के रेप-मर्डर का केस हो, हर मौकों पर सरकार की किरकिरी हुई।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मानना है कि इस तरह के मामलों को और अच्छे तरीके से हैंडल किया जा सकता था। लेकिन DGP इन मामलों में एक्ट यानी कड़ाई से कार्रवाई करते हुए नहीं दिखे। जबकि, भाजपा सरकार हमेशा पब्लिक में अपना परसेप्शन काम करते दिखाने की बनाना चाहती है।

सूत्रों के मुताबिक, विनय कुमार की छवि हमेशा ईमानदार, समझदार, सरल और नेक अधिकारी की रही है। वह विवादों से दूर चुपचाप काम करने वाले अफसरों में गिने जाते रहे हैं। बदलते दौर में यही इमेज उनके लिए निगेटिव हो गया।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने समय से पहले DGP को हटाकर लोगों के बीच यह मैसेज दिया कि सरकार लॉ एंड ऑर्डर पर गंभीर है। हम बड़े अफसर पर भी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे।

15 अप्रैल को राज्य में सत्ता बदल गई। भाजपा के सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री है। बताया जा रहा है कि विनय कुमार की ट्यूनिंग नई सरकार से नहीं बन पा रही थी।

15 अप्रैल को राज्य में सत्ता बदल गई। भाजपा के सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री है। बताया जा रहा है कि विनय कुमार की ट्यूनिंग नई सरकार से नहीं बन पा रही थी।

2. सरकार को अपना DGP बनाना है

IPS अफसर विनय कुमार को नीतीश कुमार की सरकार में DGP बनाया गया था। उन्हें नीतीश के करीबी अफसरों में गिना जाता है। यही उनके जाने का सबसे बड़ा कारण है।

सूत्रों के मुताबिक, राज्य में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बना है। अब सरकार चाहती है कि अपने गुडबुक के अफसरों के हाथों में सीधे कमान सौंपी जाए। ताकि वह हमारी नीतियों को तेजी से लागू कर सके।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार अपने मन-मिजाज के IPS अफसर को DGP बनाना चाहती है। चूंकि DGP, गृह सचिव जैसे पद सरकार में काफी महत्वपूर्ण होते हैं। CMO से नीतीश के चेहते अफसरों को हटाने के बाद सरकार पुलिस महकमे में भी अपने खास अफसरों को बैठाना चाहती है।

DGP के हटने से पहले सरकार ने अपने खास 1997 बैच के IAS अफसर पंकज कुमार को गृह सचिव बनाया है। अब DGP के हटने के बाद पुलिस महकमा पूरी तरह वर्तमान सरकार के चहेते अफसरों के हवाले हो जाएगा।

1991 बैच की IPS अफसर प्रीता वर्मा को सरकार ने कार्यवाहक DGP बनाया है। जो महिला और दलित समाज से आती हैं। विनय कुमार के हटने के बाद अंदरखाने मची गहमागहमी के बाद ज्यादा संभव है कि प्रीता वर्मा को ही आगे DGP बनाए रखा जा सकता है।

सवाल-3ः जब सरकार विनय कुमार से नाराज थी तो CIC क्यों बनाया?

जवाबः इसके 3 बड़े कारण हैं। जानिए…

1. भूमिहार BJP के कोर वोटर, नाराज नहीं करना चाहती सरकार

विनय कुमार भूमिहार समाज से आते हैं। जो भाजपा का कोर और परंपरागत वोटर हैं। सूत्रों के मुताबिक, विनय कुमार के हटाने की खबर जैसे बाहर आई, अंदरखाने हलचल तेज हो गई। समाज के अंदर नाराजगी ना फैले इसलिए सरकार ने तुरंत उनकी तैनाती राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) के तौर पर कर दी।

दरअसल, विनय कुमार से पहले विधान पार्षद पद से भाजपा ने इसी समाज से आने वाले देवेश कुमार का इस्तीफा दिलवाया था। उनकी जगह उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को MLC बनाया गया था। तब मैसेज गया कि भूमिहार को हटाकर भाजपा ने कुशवाहा को सीट दी।

सूत्रों के मुताबिक, विनय कुमार को हटाने का एक बार फिर भूमिहार समाज में गलत मैसेज जा सकता था। इसलिए अबकी बार इसको काउंटर करने के लिए सरकार ने उनकी नई तैनाती करने में तनिक भी देर नहीं की।

12 दिसंबर 2024 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विनय कुमार को DGP बनाया था। जिनका कार्यकाल 12 दिसंबर 2026 तक था।

12 दिसंबर 2024 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विनय कुमार को DGP बनाया था। जिनका कार्यकाल 12 दिसंबर 2026 तक था।

2. नीतीश-ललन के करीबी अफसर, CIC बनाकर साधा

पॉलिटिकल सर्किल में विनय कुमार को पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का करीबी अफसर माना जाता है। अंदरखाने चर्चा है कि उनके हटने से काफी किरकिरी हुई है।

लोगों के बीच मैसेज गया है कि सरकार में अब सिर्फ BJP की चल रही है। इस मैसेज को ही काउंटर करने के लिए उनकी CIC के तौर पर ताजपोशी की गई है। अब कहने के लिए हो गया कि यह विनय कुमार का डिमोशन नहीं, प्रमोशन है।

सीनियर जर्नलिस्ट इंद्रभूषण कहते हैं, ‘संवैधानिक नजरिए से देखें तो विनय कुमार 12 दिसंबर 2026 के बाद DGP पद से रिटायर होने के बाद घर बैठते। ऐसे में बदली हुई परिस्थिति और निर्णय के बाद उनको अगले 3 साल के लिए CIC बना दिया गया। जिसे एक तरह से प्रमोशन कहा जाएगा।’

3. सरकार के गुडबुक के अफसर

मुख्य सूचना आयुक्त के पास महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। उसके पास सरकार की हर वो जानकारी होती है, जिससे वह जब चाहे सरकार को परेशान कर सकता है। यही वजह है कि सरकार मुख्य सूचना आयुक्त ऐसे अफसर को बनाती है, जो उसका भरोसेमंद हो।

इस क्राइटेरिया पर विनय कुमार फीट बैठते हैं। वह हमेशा सरकार के गुडबुक के अफसर रहे हैं। वह वही करते हैं, जो सरकार की इच्छा होती है। ज्यादा महत्वकांक्षी नहीं हैं। शांत और बेदाग अफसर हैं।



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