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दरभंगा में डिलीवरी के बाद महिला की मौत:10 महीना पहले लव मैरिज हुई थी; परिजन ने डॉक्टर पर लापरवाही और नवजात को रखने का लगाया आरोप




दरभंगा में डिलीवरी के बाद प्राइवेट अस्पताल में महिला की मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और डिलीवरी के बाद भी दोबार ऑपरेशन करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि नवजात बच्ची को भी अस्पताल प्रबंधन ने कथित रूप से बकाया राशि का भुगतान नहीं होने के कारण अपने पास रखा है। मृतका की पहचान कमतौल थाना क्षेत्र के अहियारी गांव के वार्ड नंबर-10 निवासी राजा बाबू की पत्नी सोना देवी(19) के तौर पर हुई है। 10 महीना पहले लव मैरिज हुई थी। ‘दोबारा ऑपरेशन करने पर बिगड़ी हालत’ मृतका की सास अनीता देवी ने बताया कि 17 सितंबर को बहू को दिल्ली मोड़ स्थित हॉस्पिटल में एडमिट कराया था। डॉक्टरों ने सिजेरियन के माध्यम से बच्ची का जन्म कराया। ऑपरेशन के बाद जच्चा और बच्चा दोनों की स्थिति ठीक बताई गई थी। कुछ देर बाद कहा गया कि फिर से ऑपरेशन करने होगा। दोबारा ऑपरेशन करने पर हालत बिगड़ गई। 18 सितंबर को उसकी मौत हो गई। इलाज के नाम पर 80 हजार रुपए तक वसूल लिए। मौत के बाद शव को एंबुलेंस से घर भेज दिया गया, जबकि नवजात को अस्पताल में ही रख लिया। ससुर बोले- इतना पैसा कहां से लाएंगे मृतका के ससुर विनोद दास ने पूरे मामले में प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा जच्चा-बच्चा दोनों ठीक थे। दोबारा ऑपरेशन करने पर हालत बिगड़ गई। अस्पताल की ओर से अब बकाया राशि के रूप में करीब 60 हजार रुपए की मांग की जा रही है।
10 महीना पहले हुई थी शादी मृतका के पति राजा बाबू ने बताया कि करीब 10 महीना पहले हमारी शादी हुई थी। शादी से पहले हमारा अफेयर था। दोनों परिवारो को इसकी जानकारी थी। पारिवारिक स्तर पर शादी की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान ग्रामीणों ने दोनों को साथ पकड़ लिया, जिसके बाद गौतम कुंड स्थित मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कराया गया। राजा बाबू के अनुसार, शादी के बाद उनकी पत्नी गर्भवती हुई। स्वास्थ्य को देखते हुए मायके चली गई थी। प्रसव पीड़ा होने पर मायके के लोग उसे दिल्ली मोड़ स्थित निजी अस्पताल ले गए। वहां सिजेरियन से बच्ची का जन्म हुआ, लेकिन लापरवाही से मेरी पत्नी की जान चली गई। परिजन का दावा- पांच दिन से नवजात अस्पताल में है परिजनों का कहना है कि महिला की मौत के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन नवजात बच्ची अभी भी अस्पताल में है। करीब पांच दिनों से बच्ची को अस्पताल प्रबंधन ने अपने पास रखा है और बकाया राशि जमा करने के बाद ही सौंपने की बात कही जा रही है। परिवार ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग की है।



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