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पटना के इस्कॉन मंदिर में आज राधाष्टमी धूम-धाम से मनाई गई। इसे लेकर भव्य आयोजन किया जाएगा। पूरे मंदिर परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राधारानी का भव्य महाभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, फलों के रस और विभिन्न औषधीय द्रव्यों से अभिषेक हुआ। इसके बाद राधारानी को नए वस्त्र और आभूषण पहनाए गए तथा छप्पन भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में हरिनाम संकीर्तन हुआ उत्सव के दौरान मंदिर परिसर में हरिनाम संकीर्तन हुआ। मृदंग और करताल की धुन के बीच श्रद्धालु महामंत्र का संकीर्तन करते हुए झूमते नजर आए। कार्यक्रम के अंत में राधारानी की महाआरती की गई। इसके बाद मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं और आगंतुकों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। मंदिर की विशेष सजावट दिल्ली, कोलकाता, बंगलौर के फूल से की गई। इसके साथ ही साथ ही सुरक्षा की भी कड़े इंतजाम किए गए। राधा-कृष्ण के प्रेम का बताया आध्यात्मिक महत्व इस्कॉन टीएमसी के को-चेयरमैन आदिकर्ता दास ने कहा कि राधारानी को ब्रज की अधिष्ठात्री देवी और भक्ति की सर्वोच्च अभिव्यक्ति माना जाता है। उन्होंने राधारानी की कृपा को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से जोड़ते हुए उनके महत्व पर प्रकाश डाला। राधापति चरण दास ने राधा-कृष्ण के प्रेम को जीव और परमात्मा के मिलन का प्रतीक बताया। वेणु विनोद दास ने राधारानी की करुणा और आध्यात्मिक महिमा पर विचार रखे। जनमाष्टमी के ठीक 15 दिन बाद राधाष्टमी मनाया जाता इस्कॉन पटना के कम्युनिकेशन हेड नंदगोपाल दास ने कहा कि कृष्ण जनमाष्टमी के ठीक 15 दिन बाद राधाष्टमी मनाया जाता है। इस दिन राधा रानी का अवतरण दिवस होता है। इसे जन्म दिवस इसलिए नहीं कहेंगे, क्योंकि कहते हैं कि भगवान का जन्म और कर्म दोनों ही दिव्य होता है। इसलिए हम कहते हैं कि राधा रानी का अवतरण दिवस है। नंदगोपाल दास ने कहा कि राधा रानी भगवान की तीन शक्ति हैं, जिसमें अंतरंगा, बहिरंगा और तटस्था शामिल है। ऐसे में राधा रानी भगवान की अंतरंग शक्ति हैं।
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इस्कॉन मंदिर में धूमधाम से मनी राधाष्टमी:राधारानी का किया महाभिषेक, हरिनाम संकीर्तन में झूमे श्रद्धालु; छप्पन भोग किया अर्पित
