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भागवत बोले- धर्म रिलिजन नहीं, जीवन का अनुशासन है:प्राण बचाने के लिए भी इसे न छोड़ें; उज्जैन में धर्म संसद में 1700 स्टूडेंट मौजूद




धर्म रिलिजन नहीं है, जीवन का अनुशासन है। किसी इच्छा की पूर्ति, भय, लोभ या प्राण बचाने के लिए भी धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। सुख-दुख आते-जाते रहते हैं, लेकिन धर्म नित्य रहता है। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को उज्जैन में कही। युवा धर्म संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा- धर्म को लेकर भ्रम का एक कारण अपनी भाषा और धर्म के वास्तविक अर्थ को भूल जाना है। पश्चिमी देशों के लोगों ने भारत में धर्म के आचरण, उससे जुड़े कर्मकांड और अनुशासन को देखा। उसे अपने यहां के ‘रिलिजन’ के समान समझ लिया। बाद में हम भी धर्म को रिलिजन कहने लगे। जैसे कुश्ती सीखने के लिए अखाड़े में दंडबैठक लगाना जरूरी है, वैसे ही धर्म के कर्मकांड और अनुशासन उसके अभ्यास का हिस्सा हैं। कर्मकांड धर्म का एक अंग है, पूरा धर्म नहीं। रिलिजन धर्म नहीं है। आपको मोक्ष की ओर ले जाएगा धर्म संघ प्रमुख ने कहा- जीवन में आप जो भौतिक सुख, इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति चाहते हैं, वह धर्म के पालन से ही मिलती है। धर्म आपको मोक्ष की ओर ले जाएगा। किसी इच्छा को पूरा करने, डर या लालच के कारण या अपनी जान बचाने के लिए भी कभी धर्म का त्याग न करें। खुशी हुई कि युवा धर्म के बारे में सोच रहे भागवत ने कहा- मुझे खुशी हुई कि युवा धर्म के बारे में सोच रहे हैं। आजकल ये बात सुनाई नहीं देती। लोग कहते हैं कि यह बुढ़ापे की चीज है। गीता और रामायण रिटायरमेंट के बाद पढ़ने के ग्रंथ है, लेकिन ऐसा नहीं है। धर्म अस्तित्व के प्रारंभ से लेकर अंत तक रहता है। सब कुछ उसी के अनुसार चलता है। आप इसको मानो या मत मानो। जब कोई व्यक्ति अहंकार में आकर काम करता है, यह मानकर कि सब कुछ उसके नियंत्रण में है और उसकी इच्छा के अनुसार होना चाहिए तो उसे गलतफहमी हो जाती है। आज धर्म की अवधारणा पर व्याख्यान उज्जैन के गीता भवन में तीन दिवसीय युवा धर्म संसद की शुरुआत 17 सितंबर को हुई थी। आज शुक्रवार को दूसरे दिन धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा पर व्याख्यान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सूचना-विचार संघर्ष पर संवाद के बाद देशभर से चयनित युवाओं का विशेष उद्बोधन सत्र होगा। अवधेशानंद गिरि महाराज, लेखक और गीतकार मनोज मुंतशिर, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी समेत 300 विद्वान, शिक्षक, शोधकर्ता और धर्माचार्य भी इसका हिस्सा हैं। कार्यक्रम में देशभर से करीब 1700 छात्र-छात्राएं शामिल होने पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 19 सितंबर को समापन सत्र में शामिल होंगे। उज्जैन में धर्म संसद का छठा संस्करण कार्यक्रम के सह मीडिया प्रमुख बादल सिंह ने कहा- युवा धर्म संसद का छठा संस्करण इस बार उज्जैन में आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले काशी, अयोध्या, हरिद्वार, मथुरा और कांचीपुरम में इसका आयोजन हो चुका है। इन आयोजनों में करीब 7,100 प्रतिभागी शामिल हुए हैं।



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