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मोतिहारी में भ्रष्टाचार के आरोप में 4 सिपाही बर्खास्त:छापेमारी के दौरान 3 लाख कैश चुराते पकड़े गए, धोखाधड़ी-ठगी मामले में करने गए थे कार्रवाई




मोतिहारी में भ्रष्टाचार के आरोप में पुलिस अधीक्षक ने चार सिपाहियों को बर्खास्त कर दिया है। इन सिपाहियों को तुरंत नौकरी से हटा दिया गया। एसपी ने दूसरे पुलिसकर्मियों को भी चेतावनी दी है कि अगर कोई ऐसे मामले में पकड़ा जाता है, तो उस पर भी सख्त कार्रवाई होगी। यह मामला गोविन्दगंज थाना क्षेत्र के रढ़िया गांव का है। यहां अमरेश पांडेय के घर पर जौनपुर, उत्तर प्रदेश के मोहनजी गुप्ता के साथ धोखाधड़ी और ठगी हुई थी। 7 से 9 बदमाशों ने उनसे 19 लाख रुपए नगद, 2 मोबाइल और 1 सोने की चेन छीन ली थी। इस घटना को लेकर गोविन्दगंज थाने में केस नंबर 280/2025 दर्ज किया गया था। 4 सिपाही ने बरामद कैश से निकाले 3 लाख रुपए लूटी गई संपत्ति को ढूंढने और आरोपियों को पकड़ने के लिए बड़े अधिकारियों के निर्देश पर एक टीम बनाई गई थी। इस टीम ने 21 नवंबर 2025 की रात आरोपी चंदन सिंह के घर छापा मारा। वहां से 4.15 लाख रुपए नगद, 10 सोने जैसे बिस्कुट और 1 सोने जैसी चेन मिली। छापेमारी टीम में शामिल चार सिपाही – संतोष कुमार (सिपाही/940), गौतम कुमार यादव (सिपाही/672), कृष्ण कुमार (सिपाही/633) और ओमप्रकाश (सिपाही/14) ने इस मौके का फायदा उठाया। उन्होंने बरामद बैग से कुछ पैसे निकालकर छिपा दिए। पूछताछ करने पर चारों ने बताया कि उन्होंने 3 लाख रुपए निकालकर गाड़ी में छिपाए थे, जिसे बाद में बरामद कर लिया गया। चारों सिपाहियों को किया गया गिरफ्तार इस हरकत को देखते हुए गोविन्दगंज थाना के पुलिस इंस्पेक्टर राजकुमार मिश्रा ने आवेदन दिया। इसके आधार पर साहेबगंज (मुजफ्फरपुर) थाने में 22.11.2025 को केस नंबर 691/2025, धारा 303(2)/317(2) BNS के तहत मामला दर्ज किया गया। चारों सिपाहियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। घटना की गंभीरता के बाद चारों सिपाहियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई। उन्हें निलंबित करके उनसे जवाब मांगा गया। उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद विभागीय जांच के लिए पूर्वी चंपारण के अपर पुलिस अधीक्षक, साइबर क्राइम, प्रीतीश कुमार को जांच अधिकारी बनाया गया। साइबर थाने के पुलिस उप-निरीक्षक सौरभ कुमार आजाद को प्रस्तुतीकरण अधिकारी नियुक्त किया गया। जांच में उपलब्ध साक्ष्यों और अभिलेखों के परीक्षण के बाद चारों सिपाहियों को कर्तव्य के प्रति लापरवाही और मनमानेपन का पूरी तरह दोषी पाया गया। बिहार सरकारी सेवक नियमावली के आधार पर कार्रवाई पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने कहा कि इन चारों सिपाहियों का कृत्य भ्रष्ट आचरण और नैतिक अक्षमता को दर्शाता है। इससे पुलिस की छवि धूमिल हुई है और बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली-1976 के नियम-III तथा बिहार पुलिस एक्ट-2007 के रूल-31(0) का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है। इसी आधार पर बिहार सरकारी सेवक नियमावली-2005, नियम-14 (xi) एवं पुलिस हस्तक नियम-824 के तहत चारों सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।



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