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भागलपुर में 27 बेंचों पर राष्ट्रीय लोक अदालत:जज बोले-देश में 5.5 करोड़, बिहार में 64 लाख मामले पेंडिंग; सुलह से निपटारे पर जोर




भागलपुर में शनिवार को इस साल की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार, नई दिल्ली और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर आयोजित लोक अदालत में लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए जिले में 27 बेंच गठित की गईं। अलग-अलग प्रकृति के मामलों की सुनवाई के लिए अलग व्यवस्था की गई थी। बड़ी संख्या में परिवादी और संबंधित पक्षकार लोक अदालत पहुंचे और आपसी सुलह-समझौते के जरिए मामलों के समाधान की प्रक्रिया में शामिल हुए। लोक अदालत में अलग-अलग प्रकार के मामलों के निपटारे के लिए अलग-अलग बेंच बनाई गई थीं। चालान से संबंधित मामलों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई थी। इस दौरान भागलपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिलाधिकारी अलंकृता पांडे, SSP प्रमोद कुमार यादव, फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के सचिव समेत कई न्यायिक पदाधिकारी मौजूद रहे। आपसी सहमति से होता है मामलों का निपटारा राष्ट्रीय लोक अदालत की खासियत यह है कि यहां मामलों का समाधान पक्षकारों की आपसी सहमति और सुलह-समझौते के आधार पर किया जाता है। समझौते के आधार पर निपटाए गए मामलों में सामान्य तौर पर आगे अपील का रास्ता नहीं रहता और मामला अंतिम रूप से समाप्त माना जाता है। इससे लोगों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलती है और समय व धन की बचत होती है। देशभर में करीब साढ़े पांच करोड़ मामले लंबित जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। उनके अनुसार, करीब साढ़े पांच करोड़ मामले लंबित हैं, जबकि बिहार में लगभग 64 लाख मामले लंबित होने की जानकारी है। उन्होंने उपलब्ध एआई-जनरेटेड आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इनमें करीब 40 लाख मामले आपराधिक प्रकृति के हैं। वहीं, लगभग 10 लाख मामले कंपाउंडेबल क्रिमिनल केस की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक मामलों का लोक अदालत के माध्यम से निपटारा हो, इसके लिए विभिन्न ट्रिब्यूनल और संस्थानों से मामलों को लोक अदालत में लाने की जरूरत है। उपभोक्ता अदालत और शिक्षा ट्रिब्यूनल के मामले भी लाने पर जोर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि उपभोक्ता अदालत, शिक्षा ट्रिब्यूनल समेत कई संस्थानों के मामले अभी पर्याप्त संख्या में लोक अदालत तक नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे मामलों को भी लोक अदालत में लाकर उनका त्वरित निपटारा करने का प्रयास किया जाना चाहिए। लोक अदालत में नहीं लगती फीस लोक अदालत की कार्यप्रणाली के बारे में उन्होंने बताया कि यहां सभी संबंधित पक्ष बराबरी के स्तर पर बैठकर बातचीत और सुलह-समझौते के आधार पर विवाद का समाधान करते हैं। लोक अदालत में किसी तरह की फीस नहीं ली जाती है। यदि किसी मामले का निपटारा सुलह के आधार पर होता है तो संबंधित पक्ष को नियमानुसार कोर्ट फीस वापस भी की जाती है। विवाद लंबा खींचने के बजाय समाधान पर जोर उन्होंने कहा कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य किसी विवाद को लंबे समय तक चलाने के बजाय आपसी सहमति से उसका समाधान कराना है। भागलपुर में गठित 27 बेंचों के जरिए अलग-अलग प्रकृति के मामलों के निपटारे की व्यवस्था की गई। लोक अदालत के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ लोगों को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि आपसी सुलह और समझौते से विवादों का त्वरित और प्रभावी समाधान किया जा सकता है।



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