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सहरसा में बाबा कारू खिरहरी न्यासधारी नियुक्ति विवाद:निरंजन कुमार बोले- 1889 की वसीयत और वंश परंपरा से हुई नियुक्ति; जांच के लिए सभी दस्तावेज मौजूद




सहरसा के प्रसिद्ध संत बाबा कारू खिरहरी से जुड़े धार्मिक न्यास में न्यासधारी की नियुक्ति को लेकर विवाद चल रहा है। इस बीच, वर्तमान न्यासधारी निरंजन कुमार ने सोमवार की शाम महपुरा मे प्रेस वार्ता कर अपनी स्थिति साफ की है। उन्होंने अपनी नियुक्ति को पूरी तरह वैध बताया है। निरंजन कुमार ने कहा कि उनकी नियुक्ति 1889 के ऐतिहासिक वसीयतनामे, पारिवारिक वंश परंपरा और वैध उत्तराधिकार दस्तावेजों के आधार पर धार्मिक न्यास परिषद ने की है। उन्होंने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए वित्तीय गड़बड़ी और पद के गलत इस्तेमाल के सभी आरोपों को खारिज कर दिया। संत कारू खिरहरी के छोटे भाई के वंशज होने की बात कही महिषी प्रखंड के महपुरा स्थित संत बाबा कारू स्थान परिसर में यह प्रेस वार्ता हुई। निरंजन कुमार ने बताया कि संत कारू खिरहरी उनके पूर्वज थे। चूंकि कारू खिरहरी का कोई वंश आगे नहीं बढ़ा, इसलिए उनकी पूरी संपत्ति और पारिवारिक उत्तराधिकार उनके छोटे भाई लक्षण खिरहरी को मिला था। निरंजन कुमार खुद लक्षण खिरहरी के ही वंशज हैं। 1889 के वसीयतनामे में उत्तराधिकार की व्यवस्था का जिक्र निरंजन कुमार ने ऐतिहासिक दस्तावेजों का जिक्र करते हुए बताया कि लक्षण खिरहरी के दो बेटे थे – निर्मल खिरहरी और झामन खिरहरी। 5 मार्च 1889 को निर्मल खिरहरी द्वारा लिखे गए मूल वसीयतनामे में साफ लिखा है कि महंत और प्रबंधक की नियुक्ति निर्मल और झामन खिरहरी के खानदान से ही होगी। 1889 से 2024 तक सिलसिलेवार बताया उत्तराधिकार उन्होंने सिलसिलेवार उत्तराधिकार का ब्योरा भी दिया। 5 मार्च 1889 को निर्मल खिरहरी ने बोलत खिरहरी को जिम्मेदारी सौंपी थी। 1 जनवरी 1902 को बोलत खिरहरी ने बीरू खिरहरी को नियुक्त किया। 11 मई 1931 को बीरू खिरहरी ने मुसो खिरहरी को उत्तराधिकारी बनाया। इसके बाद, 16 नवंबर 1940 को मुसो खिरहरी ने बुची खिरहरी और गेजा खिरहरी को संयुक्त प्रभार दिया। 16 मार्च 1974 को बुची खिरहरी और गेजा खिरहरी ने तारणी खिरहरी को प्रबंधक नियुक्त किया। आखिर में, 3 जून 2024 को तारणी खिरहरी ने विधिवत रूप से निरंजन कुमार को अपना उत्तराधिकारी और प्रबंधक नियुक्त किया। जांच के लिए सभी साक्ष्य उपलब्ध न्यासधारी ने दावा किया कि 1889 से लेकर 2024 तक की यह वसीयत व उत्तराधिकार श्रृंखला पूरी तरह दस्तावेजी साक्ष्यों से प्रमाणित है। इन्हीं पुख्ता कागजातों की जांच के बाद बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने उन्हें न्यासधारी नियुक्त किया है। उन्होंने कहा कि उनके पास सभी मूल दस्तावेज और वंशावली सुरक्षित हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर सक्षम प्रशासनिक एवं न्यायिक अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। ग्रामीणों ने बैठक कर लगाए थे गंभीर आरोप उल्लेखनीय है कि बीते दिनों स्थानीय ग्रामीणों ने एक बैठक आयोजित कर वर्तमान न्यासधारी निरंजन कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि मंदिर के विकास कोष में भारी घोटाला और राशि का गबन किया गया है। साथ ही, निरंजन कुमार पर गलत तथ्यों के आधार पर गैर-कानूनी तरीके से न्यासधारी बनने का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई थी। इसी विवाद की पृष्ठभूमि में न्यासधारी ने यह प्रेस वार्ता कर अपना पक्ष रखा है।



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